अखबार बेचने वाले शख्स ने बनाई 10 हजार करोड़ की कंपनी।

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झारखंड के धनबाद में बचपन बिताने वाले अंबरीश की लाइफ ‘स्लम डॉग मिलियनेयर’ के एक्टर जमाल मलिक से मिलती जुलती है। मुंबई के स्लम एरिया से निकलकर फिल्म में जिस तरह जमाल मिलियनेयर बन जाता है। वैसे ही, अंबरीश दिल्ली के स्लम एरिया से निकलकर रियललाइफ में 10 हजार करोड़ रुपए की कंपनी के मालिक बन गए हैं।

 

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बता दें कि अंबरीश की फैमिली पहले कोलकाता में रहती थी। वहीं, उनका जन्म हुआ था। जॉब के लिए उनकी फैमिली झारखंड के धनबाद में आकर बस गई। वहीं के स्कूल से अंबरीश की पढ़ाई शुरू हुई। अंबरिश के पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन उनका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता था। पढ़ाई नहीं करने की वजह से वे स्कूल में कई बार फेल हो गए थे। अंबरीश को बचपन से ही कंप्यूटर काफी पसंद था।

 

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पढ़ाई के बोझ से बचने के लिए उन्होंने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। पिता को लेटर लिखकर वे मुंबई जाने के लिए रवाना हो गए। हालांकि, बाद में उनका इरादा बदल गया और अंबरीश दिल्ली चले आए। 15 साल की उम्र में घर से भागकर वो दिल्ली पहुंचे थें। यहां उन्हें रहने का कहीं ठिकाना नहीं मिल रहा था। आखिरकार, अंबरीश ने स्लम में रहने का इरादा बना लिया। वे स्लम में रहकर अखबार बेचने का काम करने लगे।

 

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अंबरीश ने एक दिन अखबार में एक ऐड देखा। जिसमें बिजनेस आइडिया मांगा गया था। इसके बदले 5 लाख रुपए देने का इनाम रखा गया था। उन्होंने महिलाओं को फ्री इंटरनेट देने का आइडिया देकर इनाम अपने नाम कर लिया। इसी पैसे से वुमेन इन्फोलाइन शुरू किया। अंबरीश के मुताबिक वे उस समय तक अच्छे लीडर नहीं थे। कंपनी को मुनाफा भी नहीं हो रहा था। साल 2000 में उन्होंने कंपनी छोड़कर लंदन चले गए। वहां टेक्नोलॉजी कंपनी शुरू करना चाहा, लेकिन सफलता नहीं मिली। जो पैसे थे, सब खर्च हो गए आखिरकार खर्च निकालने के लिए एक बीमा कंपनी ज्वाइन करना पड़ा।

 

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बीमा कंपनी में जॉब के दौरान ही अंबरीश को शराब की लत लग गई थी। एक दिन लंदन के एक पब में शराब पीते-पीते किस्मत ने करवट ली। दोस्त उमर तैयब (ब्लिपर के को-फाउंडर) के साथ पब में बैठे थे। आखिरी पैग के लिए मैंने काउंटर पर 15 डॉलर रखे और मजाक में कहा, कितना अच्छा होता कि नोट से महारानी एलिजाबेथ बाहर आ जाती। यही मजाक बिजनेस आइडिया बन गया। उमर ने मेरी फोटो ली और उसे महारानी की फोटो पर सुपरइंपोज कर दिया। फिर हमने इस एप को डेवलप करने को सोची। और इस तरह ‘ब्लिपर’ कंपनी का जन्म हुआ।’

 

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अंबरीश ने 2011 में ब्लिपर लांच की थी। यह पोकेमन गो की तरह मोबाइल फोन के लिए ‘ऑगमेंटेड रियलिटी’ एप्स बनाती है। ब्लिपर के एप भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। 12 जगहों पर ऑफिस हैं। करीब 300 स्टाफ हैं। बता दें कि अंबरीश की कंपनी 170 देशों में 650 करोड़ रुपए का निवेश जुटा चुकी है। इसने जगुआर, यूनिलीवर, नेस्ले जैसी कंपनियों के साथ टाइ-अप किया है।

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