एयर फोर्स के नायक अर्जन सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार।

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भारतीय वायु सेना के मार्शल और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक अर्जन सिंह का आज दिल्ली में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अर्जन सिंह वायुसेना के एकमात्र अधिकारी थे, जिन्हें फाइव स्टार रैंक प्रदान किया गया था। उन्हें 44 वर्ष की आयु में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया।

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वर्ष 1965 की लड़ाई में जब भारतीय वायु सेना अग्रिम मोर्चे पर थी तब वह उसके प्रमुख थे। उनका 98 साल की उम्र में शनिवार शाम को निधन हो गया। अर्जन सिंह का अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर में 15 अप्रैल 1919 को जन्म हुआ था। दिल्ली में बरार स्कॉयर में अर्जन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया।

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इस दौरान तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, देश की पहली महिला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आ़डवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इस दौरान अर्जन सिंह को 21 तोपों की सलामी भी दी गई और आसमान से उन्हें सैल्यूट किया गया। रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके अंतिम दर्शन किए थे और श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 

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मार्शल अर्जन सिंह योद्धा नहीं बल्कि महायोद्धा थे। वे बोली से नहीं गोली से जवाब देने में विश्वास करते थे। अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और विश्व में चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

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बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने वाले सिंह ना केवल निडर लड़ाकू पायलट थे बल्कि उनको हवाई शक्ति के बारे में गहन ज्ञान था जिसका वह हवाई अभियानों में व्यापक रूप से इस्तेमाल करते थे। उन्हें 1965 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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