महाराष्ट्र में दीपावली से पहले सरकारी बसों की हड़ताल यात्री परेशान|

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दिवाली के पहले ही महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के कर्मचारियों ने सोमवार मध्यरात्रि से अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। एमएसआरटीसी के कर्मचारियों ने बताया है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती है, तब तक वे अपना हड़ताल वापस नहीं लेंगे।

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परिवहन कर्मचारी 7वें वेतन आयोग को लागू करने और सिफारिशों के अनुसार 25% तक वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार 10% की अंतरिम वेतन बढ़ोतरी पर सहमत हुई थी, लेकिन संगठनों ने इसका विरोध किया। उनके अनुसार, अगर ऐसा होता है तो जिनकी बेसिक सैलरी 7,000- 8,000 रुपये है, उसमें सिर्फ 600- 700 रुपये का इजाफा होगा।

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संगठन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगे नहीं मान रही है, इसलिए वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और परिवहन मंत्री दिवाकर रावते सोमवार को कर्मचारियों से मिलकर बातचीत की, उसके बाद वेतन बढ़ोतरी के लिए एक कमेटी का गठन किया है।

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जिसमें परिवहन विभाग के ऊपर वित्तीय बोझ को देखते हुए फैसला लेने की बात कही गई है, क्योंकि एमएसआरटीसी को हर साल 450 करोड़ का नुकसान पड़ रहा है। आपको बता दें कि पूरे राज्य में 17 हजार से ज्यादा बसें चलती हैं, जिसके लगभग एक लाख कर्मचारी आधी रात से हड़ताल पर हैं। पुलिस ने हड़ताल के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। इस हड़ताल के कारण मंगलवार से मुंबई के यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल शुरु होने के बाद कई घंटों से लोग सड़कों और बसों में फंसे हुए हैं।

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दूसरी तरफ महाराष्ट्र के परिवहन आयुक्त प्रवीण गेदाम ने बताया, ‘‘राज्य परिवहन कर्मचारियों के हड़ताल के कारण सभी तरह की (निजी) बसों (स्कूल और कंपनी वाहनों) को राज्य परिवहन डिपो से यात्रियों को ले जाने की आधिकारिक अनुमति प्रदान की गई है|’’ एमएसआरटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हड़ताल ‘गैरकानूनी’ है और परिवहन एजेंसी के प्रशासन ने यूनियन के सदस्यों से काम पर वापस आने की अपील की है|

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सरकारी बसें न चलने के कारण लाखों यात्रियों को परेशानी हो रही है| हर दिन करीब दस हजार से ज्यादा लोग रोजाना मुंबई-पुणे के बीच ट्रेवल करते हैं|

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जहां हड़ताल पर गए कर्मचारियों की मांग वेतन और बोनस बढ़ाने की है, तो वहीं स्टेशन पहुंचे यात्री परेशान हैं। उनका कहना है कि उन्हें पहले से इसकी जानकारी नहीं थी। डिपो पर आने के बाद यात्रियों को पता चल रहा है कि सरकारी बसें नहीं चल रही है।

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हालांकि मुंबई में इस हड़ताल का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि शहर में बेस्ट की लोकल बसें चलती हैं लेकिन जिन्हें बस से मुंबई से बाहर जाना है उनके लिए परेशानी है| सरकारी बस कर्मचारियों की पांच यूनियन हैं| जिनमें से चार यूनियन से जुड़े लोग हड़ताल पर चले गए हैं| एक बड़ा यूनियन शिवसेना की भारतीय कामगार सेना हड़ताल पर नहीं गई है|

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