दुनिया का सबसे दुर्लभ ब्लड सिर्फ 43 लोगों के पास।

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हम सभी जानते हैं कि ब्लड टाइप्स A, B, AB और O के वैरिएशंस होते हैं। इसमें भी O नेगेटिव ब्लड को दुनिया की सबसे दुर्लभ श्रेणी में रखा जाता है। वैसे इस ब्लड ग्रुप के अलाबा भी दुनिया में एक ऐसा ब्लड ग्रुप है जो सिर्फ अबतक पूरी दुनिया में 43 लोगों के पास ही मिला है। इसका नाम रिसस नेगेटिव (RH Null) है। इस ब्लड ग्रुप की खोज 1952 में मुंबई के एक साइंटिस्ट ने की थी, जिसकी वजह से इसे Bombay Blood का नाम दिया गया है।

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उस समय भी ये ब्लड ग्रुप सिर्फ़ 4 लोगों में ही मिला था। यह बहुत ही दुर्लभ रक्त है जिसके बारे में अभी भी वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। ये केवल 43 लोगों के ही पास रिकॉर्ड किया गया है जबकि 9 लोग ही इसके डोनर हैं। इस वजह से इस ब्लड को Golden Blood भी कहा जाता है। जानिए इसमें सबसे अलग क्या है। एक इंसान की बॉडी में एंटीजन के काउंट से उसके ब्लड ग्रुप के बारे में पता चलता है।

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अगर किसी कि बॉडी में ये एंटीजन कम होते हैं तो उसका ब्लड ग्रुप रेयर माना जाता है। एंटीजन बॉडी में एंटीबॉडी बनाते हैं जो शरीर को वायरस और बैक्टीरिया से बचाते हैं। जिन लोगों के पास रिसस नेगेटिव ब्लड ग्रुप होता है वे लोगों को अपना ब्लड देकर उनकी जान बचा सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक हमारे रेड ब्लड सेल में 342 एंटीजेंस होते हैं और ये एंटीजेंस मिलकर एंटीबॉडीज बनाने का काम करते हैं। किसी भी ब्लड ग्रुप का निर्धारण इन एंटीजेंस की संख्या पर डिपेंड करता है।

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सामान्य रूप से लोगों के ब्लड में 342 में से 160 एंटीजेंस होते हैं। अगर ब्लड में इसकी संख्या में 99% कमी देखने को मिलती है, तो उसे दुर्लभ श्रेणी में रखा जाता है। यही संख्या अगर 99.99% तक पहुंच जाती है, तो ये दुर्लभ से भी ज्यादा दुर्लभ हो जाता है। रिसस नेगेटिव ब्लड ग्रुप वाले लोगों की लाइफ नॉर्मल लोगों जैसी ही होती है। लेकिन उन्हें अपना ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि इस ब्लड ग्रुप के डोनर मिलने में बहुत परेशानी आती है।

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