माँ तो हर दिन ममता लुटाती है, उसके लिए एक दिन…

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मां के लिए सिर्फ एक दिन तय करना अन्याय होगा पर भागदौड़ की जिंदगी में एक दिन भी हम सुकून से अपनी मां से बात कर सकें, उनकी खुशियों का ख्याल रख सकें या उनके लिए कुछ ऐसा कर सकें जिससे उन्हें लगे कि हम उनकी भावनाओं का महत्व समझते हैं, तो उसकी मेहनत सार्थक हो जाएगी।

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