तीसरा राष्ट्रीय हैंडलूम दिन|

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राष्ट्रीय हथकरघा दिन 7 अगस्त को मनाया जाता है ताकि इस क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल सके और हस्तनिर्मित करघाओं के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके| 7 अगस्त को भारत के इतिहास में अपने विशेष महत्व के कारण इस दिन को चुना गया था| इस दिन 1905 में स्वदेशी आंदोलन शुरू किया गया था|

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असम में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का मुख्य आयोजन गुवाहाटी में किया गया था| असम के मुख्यमंत्री सर्बानन्द सोणोवाल, वस्त्र राज्य मंत्री अजय तमटा ने इस कार्यक्रम में भाग लिया था|

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पूर्वोत्तर से एक हजार से अधिक बुनकरों ने भाग लिया था। असम के बुनकर जो पैट और मूंगा रेशम के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं उन्हें राष्ट्रीय हथकरघा दिन से और ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। असम सरकार ने पहले ही एक महत्वाकांक्षी मूगा मिशन की घोषणा की है जिनके लिए सौ करोड़ रूपया लागत दर्ज किये हैं।

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केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि बुनकर सेवा केन्द्रों के जरिये पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनकरों को विभिन्न सेवायें प्रदान की जायेगी। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर गुवाहाटी में बुनकरों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन सेवा केन्द्रों में बैंकिंग, पासपोर्ट, बीमा, पैनकार्ड, मतदाता पहचान-पत्र और आधार जैसी विभिन्न सेवाएं एक ही जगह पर उपलब्ध होगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त 2015 को चेन्नई के मद्रास विश्वविद्यालय स्थित शताब्दी सभागृह में प्रथम राष्ट्रीय हथकरघा दिन का उद्घाटन किया था, जहां उन्होंने ‘भारत हथकरघा’ ब्रांड का अनावरण भी किया था|

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