रेमंड के मालिक ने बेटे के नाम कर दी कंपनी, अब वे है बेसहारा।

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इंडिया के टॉप क्लोदिंग ब्रांड में शुमार रेमंड कंपनी के मालिक डॉ. विजयपत सिंघानिया के घर में इन दिनों गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। विजयपत का आरोप है कि बेटे गौतम सिंघानिया ने उन्हें एक-एक पैसे का मोहताज बना दिया है। इतना ही नहीं, बेटे ने उनसे ड्राइवर और गाड़ी तक छिन ली है। फिलहाल वे आज साउथ मुंबई की ग्रैंड पराडी सोसाइटी में किराए के घर में रह रहे हैं। अपनी दुर्दशा के लिए विजयपत इसका दोष अपने बेटे गौतम को देते हैं। 12 हजार करोड़ रुपए के रेमंड ग्रुप के मालिक विजयपत सिंघानिया आज पैदल घूम रहे हैं।

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विजयपत सिंघानिया ने अपने मेहनत और पसीने से रेमंड शूटिंग्स का बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया। विजयपत सिंघानिया ना सिर्फ कामयाब बिजनेसमैन थे बल्कि उनका सिक्का एविएशन, और फिल्म इंडस्ट्री में भी चलता था। डॉ विजयपत सिंघानिया के वकील दिनयार मदन ने कहा, ‘डॉ सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर बेटे को दे दिये, इसकी कीमत करीब करीब एक हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन बेटे गौतम ने अपने पिता को कहीं का नहीं छोड़ा, विजयपत सिंघानिया अब अपने ही बेटे के खिलाफ केस लड़ रहे हैं।’

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वकील के मुताबिक विजयपत सिंघानिया घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विजयपत सिंघानियां ने मुंबई हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है और कहा है कि मालाबार हिल स्थित 36 मंजिला जेके हाउस में एक डुप्लेक्स का मालिकाना हक उन्हें नहीं दिया गया है, जबकि रेमंड के मालिक को बार बार इस बारे में बताया जा चुका है।

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1960 में जब जेके हाउस बनकर तैयार हुआ तब यह 14 मंजिला था। बाद में चार डुप्लेक्स रेमंड की ही सहायक कंपनी पश्मीना होल्डिंग्स को दे दी गईं। 2007 में कंपनी ने फिर से पुनर्निर्माण शुरू करवाया। करार के हिसाब से विजयपत सिंघानिया, उनके बेटे गौतम, विजयपत के महरूम भाई अजयपत सिंहानिया की पत्नी वीणा देवी और उनके बेटे अनंत और अक्षयपत को 5,185 स्क्वेयर फीट का डुप्लेक्स मिलना था। इसकी कीमत 9,000 स्क्वेयर प्रति फीट थी।

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अपार्टमेंट में अपने दावों को लेकर वीणा देवी और अनंत ने पहले से संयुक्त याचिका दाखिल कर रखी है। इनके अलावा अक्षयपत ने भी अलग से याचिका डाल रखी है। विजयपत सिंघानिया के वकील दिनयार मदन ने कोर्ट को बताया कि 78 वर्षीय सिंघानिया ने अपनी सारी संपत्ति अपने बेटे के नाम कर दी, लेकिन बेटा अब उनपर ध्यान नहीं दे रहा है। गौतम ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। अदालत ने संबंधित पक्ष से गुजारिश की है कि इस केस को बातचीत के जरिये ही सुलझाया जाए।

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