अलग-अलग धर्म के पांच जजों ने दिया तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला।

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तीन तलाक पर 18 महीने बाद कल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया। हजारों साल पुरानी इस प्रथा पर 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से फैसला दिया। यह पांच जजों की राय थी। देश के पांच सबसे वरिष्ठ जजों चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) ने तीन तलाक को संवैधानिक करार दिया जाए। वहीं, जस्टिस आरएफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदु)और जस्टिस कुरियन जोसेफ (ईसाई) ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। तीन तलाक यानी पति तीन बार ‘तलाक’ लफ्ज बोलकर अपनी पत्नी को छोड़ सकता है। निकाह हलाला यानी पहले शौहर के पास लौटने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रॉसेस। इसके तहत महिला को अपने पहले पति के पास लौटने से पहले किसी और से शादी करनी होती है और उसे तलाक देना होता है।

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मुस्लिम महिलाओं की ओर से 7 पिटीशन्स दायर की गई थीं। इनमें अलग से दायर की गई 5 रिट-पिटीशन भी थीं। इनमें दावा किया गया कि तीन तलाक अनकॉन्स्टिट्यूशनल है। देश में मुस्लिमों की आबादी 17 करोड़ है। इनमें करीब आधी यानी 8.3 करोड़ महिलाएं हैं। 2011 के सेंसस पर एनजीओ ‘इंडियास्पेंड’ के एनालिसिस के मुताबिक, भारत में अगर एक मुस्लिम तलाकशुदा पुरुष है तो तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं की संख्या 4 है। भारत में तलाकशुदा महिलाओं में 68% हिंदू और 23.3% मुस्लिम हैं। इस मुद्दे को मुस्लिम महिलाओं के ह्यूमन राइट्स से जुड़ा मुद्दा बताता है। तीन तलाक का सख्त विरोध करता है।

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इस फैसले में कहा गया कि तीन तलाक वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है। बेंच में शामिल दो जजों ने तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक कुरान के मूल सिद्धांतों का हिस्सा नहीं है और सरकार से इस पर कानून बनाने को कहा। चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक पर 6 महीने तक रोक लगाने और सरकार द्वारा कानून बनाने की बात कही। ये भी कहा कि राजनीतिक दलों को इस मामले पर विरोध को दरकिनार करना चाहिए। चीफ जस्टिस और नजीर ने अपने फैसले में ये भी कहा कि उम्मीद है कि केंद्र अपने कानून में मुस्लिम संगठनों की चिंताओं और शरिया कानून का ध्यान रखेगा।

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