अब सभी नवजात शिशुओं को मिलेगा मां का दूध|

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नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत समान होता है, एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर पैदा होते ही मरने वाले 100 बच्चों में से 16 बच्चों को मां का दूध मिल जाये तो उनको बचाया जा सकता है। लेकिन कई कारणों से ऐसे बच्चों को मां का दूध ही नहीं मिलता है और वो दम तोड़ देते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के शहर उदयपुर में रहने वाले योग गुरू देवेन्द्र अग्रवाल की संस्था “मां भगवती विकास संस्थान”ने “दिव्य मदर मिल्क बैंक”की स्थापना की है। जो ना सिर्फ मांओं से दूध इकट्ठा करती है बल्कि जरूरमंद बच्चों तक दूध पहुंचाने का इंतजाम भी करती है। उदयपुर और उसके आसपास के इलाकों में “दिव्य मदर मिल्क बैंक” की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने इस योजना को अब अपने बजट में शामिल किया है और इस तरह के विभिन्न शहरों में 10 मदर मिल्क बैंक खोलने की घोषणा भी कर दी है।

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नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन डायरेक्टर आलोक वर्मा का कहना है, जिन माओं का अपने बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिलता है, जो बच्चे बीमार हैं या फिर जिन्हें दूध नहीं मिलता है उनके लिए मदर बैंक कारगर साबित होगी| वहीं केजीएमयू के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसएन संखवार ने मदर मिल्क बैंक की सराहना करते हुए बताया, अगर मदर मिल्क बैंक खुलती है तो ये एक अच्छा प्रयास होगा, माँ के दूध में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बच्चे के लिए जरूरी होते हैं|

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दिल्ली के कलावती अस्पताल और राजस्थान में चल रही मदर मिल्क बैंकों की तर्ज पर अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भी मदर मिल्क बैंक बनाने की तैयारी कर रहा है।

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जब कोई माँ दूध डोनेट करने आती है तो सबसे पहले उसके स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाती है और ये देखा जाता है इनमे किसी तरह की कोई बीमारी तो नहीं है इसके बाद ही किसी माँ का दूध लिया जाता है, दूध को माइनस 20 डिग्री पर रखा जाता है| ये दूध छह माह तक खराब नहीं होता है, कम्युनिटी मिल्क बैंक करने वाला ये पहला राज्य है। इस मिल्क बैंक में प्रतिदिन 15-20 माताएं दूध डोनेट करने के लिए आती हैं। ये दूध अस्पताल में मौजूद बच्चों को जरूरत पड़ने पर डाक्टर की मांग पर दिया जाता है साथ ही समुदाय के जरूरतमंद बच्चों को फ्री में दिया जाता है।

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