वैलेंटाइन डे क्योंं मनाया जाता है जान‍िए खास बाते|

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प्रेम और इजहार का महीना है फरवरी। इसकी शुरुआत होते ही दिल की बात जुबां पर आने लगती है। अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने के लिए लोग खासतौर पर वैलेंटाइन मंथ का इंतजार करते हैं। वैसे तो वैलेंटाइन डे 14 फरवरी को मनाया जाता है, लेकिन उससे पहले ही युवा तैयारी करने लगते हैं। मॉल्स और गैलरियां सज जाती हैं रेस्टोरेंट्स भी तैयारी करने लगते हैं।

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वैलेंटाइन वीक की शुरुआत रोज डे से होती है। इस दिन गुलाब देकर अपनी चाहत का इजहार किया जाता है। लाल गुलाब जहां प्यार का प्रतीक है वहीं पीला गुलाब दोस्त की निशानी माना जाता है। वैलेंटाइन वीक का दूसरा दिन है प्रपोज डे, इस दिन जिसे आप चाहते हैं उसे अपने दिल की बात बता दें।

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वैलेंटाइन वीक का छठा दिन है हग डे, इस दिन जिसे आप चाहते हैं उसे गले लगाकर अपने दिल की बात बता दें।

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इसलिए मनाते हैं वैलेंटाइन

वैलेंटाइन डे वैलेंटाइन संत के नाम पर मनाया जाता है| 1969 में कैथोलिक चर्च ने कुल ग्यारह सेंट वैलेंटाइन के होने की पुष्टि की और 14 फरवरी को उनके सम्मान में पर्व मनाने की घोषणा की। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वेलेंटाइन रोम के सेंट वेलेंटाइन माने जाते हैं।

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1260 में संकलित की गई ‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ नामक पुस्तक में सेंट वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। उसके अनुसार विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उसने आज्ञा जारी की कि उसका कोई सैनिक या अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया।

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उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी सन् 269 को संत वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया। तब से उनकी स्मृति में प्रेम दिवस मनाया जाता है। कहा जाता है कि सेंट वेलेंटाइन ने अपनी मृत्यु के समय जेलर की नेत्रहीन बेटी जैकोबस को नेत्रदान किया व जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था ‘तुम्हारा वेलेंटाइन’। यह दिन था 14 फरवरी, जिसे बाद में इस संत के नाम से मनाया जाने लगा।

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