भारत का प्रीचीन शहर जूनागढ़|

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जूनागढ़ भारत के गुजरात प्रांत का एक प्राचीन शहर है| यह शहर गिरनार पहाड़ियों के गोद में बसा हुआ है| यह शहर मुस्लिम शासक बाबी नवाब के राज्य जूनागढ़ की राजधानी हुआ करती थी। गुजराती भाषा में जूनागढ़ का मतलब होता है प्राचीन किला| इस शहर पर कई वंशों ने राज किया है। इस शहर पर हिंदू, बौद्ध, जैन और मुस्लिम धर्मों का प्रभाव पड़ा हुआ है। विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक शाक्तियों के वजह से जूनागढ़ बहुमूल्य संस्कृति का घर बना है। जूनागढ़ अनोखी स्थापत्य कला के लिए दुनिया में जाने जाता है|

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यह शहर दो विभागों में बसा हुआ है। एक मुख्‍य शहर है जिसके चारो तरफ दीवारों की किलेबन्‍दी की गई है। दूसरा पश्‍िचम विभाग जिसे अपरकोट भी कहा जाता है। अपरकोट एक प्राचीन किला है जो शहर के बहुत ऊपर बसा हुआ है। अपरकोट किला मौर्य और गुप्त शासकों के लिए बहुत मजबूत साबित हुआ है| यह किला दुर्गम जगह होने के कारण पिछले 1000 सालो से लगभग 16 आक्रमणों का सफलतापूर्वक सामना किया है। अपरकोट का प्रवेशद्वार हिंदू तोरण स्थापत्य कला का अद्धभुत नमूना है। बौद्ध गुफा और बाबा प्यारा की गुफा, अड़ी-काड़ी वेव, नवघन कुआं और जामी मस्जिद यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल है।

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जूनागढ़ प्राचीन शहर का नामकरण एक पुराने किले के नाम के जगह से हुआ है। यहाँ पूर्व-हड़प्पा काल में स्थलों की खुदाई भी की गई थी। इस शहर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था। गिरनार पहाड़ के रास्ते में एक गहरे रंग की बेसाल्ट चट्टान भी है| जिस पर मौर्य शासक अशोक, रुद्रदामन और स्कंदगुप्त इन तीन राजवंशों के शिलालेख अंकित है। यहाँ 100-700 शताब्दी के दौरान बौद्ध राजवो के द्वारा बनाई गई गुफ़ाओं के साथ एक स्तूप भी मौजूद है।

junagadh images (10)सड़क मार्ग-जूनागढ़ राजकोट से (102 किलोमीटर), पोरबंदर से (113 किलोमीटर) और अहमदाबाद से (327 किलोमीटर) की दूरी पर है। साथ ही यह वरावल से भी जुड़ा हुआ है। यहां स्थानीय परिवहन ऑटो रिक्शा और स्थानीय बसों से आसानी से पहुंच सकते है। प्राइवेट और राज्य परिवहन की लक्जरी बसें आसानी से उपलब्ध होती है और विभिन्न प्रकार की कार भी किराये पर मिलती है।

रेल मार्ग- जूनागढ़ रेलवे स्टेशन अहमदाबाद और राजकोट रेलवे लाईन पर आता है|

हवाई मार्गजूनागढ़ से तकरीबन 40 किलोमीटर की दूरी पर केशोद और 113 किलोमीटर की दूरी पर पोरबन्दर एयरपोर्ट है। राजकोट एयरपोर्ट भी जूनागढ़ से नजदीक है।

सक्करबाग प्राणीउद्यान

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जूनागढ़ का सक्करबाग प्राणीउद्यान गुजरात का सबसे पुराना प्राणीउद्यान है। यह प्राणीउद्यान गिर के विख्यात शेर,चीते और तेंदुआ के लिए प्रसिद्ध है। यहां शेर के अलावा बाघ, तेंदुआ, भालू, गीदड़, जंगली गधे, सांप और चिड़िया भी देखने को मिलती है।

गिर अभ्यारण्य

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वन्य प्राणियों से समृद्ध गिर अभ्यारण्य लगभग 1424 वर्ग किलोमीटर में बना हुआ है। सूखें पताड़ वाले वृक्षों, कांटेदार झाड़ियों के अलावा हरे-भरे पेड़ों से समृद्ध गिर का जंगल नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां के जंगल में सागवान, शीशम, बबूल, बेर, जामुन, बील आदि मुख्य वृक्ष है। भारत के सबसे बड़े कद का हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा और बारहसिंगा भी यहां देख सकते है साथ ही यहां भालू और बड़ी पूंछ वाले लंगूर भी भारी मात्रा में मिलते है। यहां फलगी वाला बाज, कठफोडवा, एरीओल, जंगली मैना और पैराडाइज फलाईकेचर भी देख सकते है। साथ ही यह अधोलिया, वालडेरा, रतनघुना और पीपलिया आदि पक्षी भी देखने के लिए मिलते है।

दामोदर कुंड

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इस पवित्र दामोदर कुंड के चारों ओर घाट का निर्माण किया गया है। लोगो का ऐसा विश्‍वास है कि इस घाट पर भगवान श्री कृष्ण ने महान संत कवि नरसिंह मेहता को फूलों का हार पहनाया था।

अड़ी-काड़ी वेव और नवघन कुआं

अड़ी-काड़ी वेव और नवघन कुआं का निर्माण चूडासमा राजपूतों ने किया था। ये दोनों कुएं युद्ध के समय दो सालों तक पानी की कमी को पूरा कर सकते है। अड़ी-कड़ी वेव तक पहुंचने के लिए 120 पायदान नीचे उतरना पड़ता है जबकि नवघन कुंआ 52 मीटर की गहराई में है। इन कुओं तक पहुंचने के लिए गोलाकार सीढियां बनाई गई है।

 

अम्बे माता का मंदिर

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अम्बे माता का मंदिर पहाड़ की चोटी पर बना हुवा है। इस मंदिर पर नवविवाहित जोड़े शादी के बाद अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए माता का आशीर्वाद लेने आते है।

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