सतपुड़ा के गोदी में बसा शहर पचमढ़ी|

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pachmarhi images (15)मध्य प्रदेश के एकमात्र पर्वतीय स्थल होशंगाबाद जिले में पचमढ़ी शहर है| समुद्र तल से १०६७ मीटर की ऊँचाई पर पचमढ़ी शहर है। सतपुड़ा श्रेणियों के बीच में होने के कारन और अपने सुंदर स्थलों के कारण पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी भी कहा जाता है। पचमढ़ी सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का भाग होने के कारण यहां आसपास बहुत घने जंगल हैं।

pachmarhi images (20)यहाँ के जंगलों में शेर, तेंदुआ, सांभर, चीतल, गौर, चिंकारा, भालू, भैंसा तथा कई अन्य जंगली जानवर भी देखने को मिलते हैं| यहाँ घने जंगल, कलकल करते जलप्रपात और तालाब भी हैं।

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यहां की सदाबहार हरियाली घास और हर्रा, जामुन, साज, साल, चीड़, देवदारू, सफेद ओक, यूकेलिप्टस, गुलमोहर, जेकेरेंडा और अन्य छोटे-बडे सघन वृक्षों से आच्छादित वन गलियारों तथा घाटियों के कारण दृश्यावली मनमोहक है।

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पचमढ़ी में महादेव मंदिर, चौरागढ़ का मंदिर, रीछागढ़, डोरोथी डीप रॉक शेल्टर, जलावतरण, सुंदर कुंड, इरन ताल, धूपगढ़, सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान यह फेमस जगह है।

pachmarhi images (18)प्रियदर्शिनी पॉइंट – यहां से सूर्यास्त का दृश्य बहुत ही लुभावना दिखता है। तीन पहाड़ी शिखर बायीं तरफ चौरादेव, बीच में महादेव और दायीं ओर धूपगढ़ हैं। इन शिखर में से धूपगढ़ सबसे ऊँची चोटी है।

pachmarhi images (3)रजत प्रपात – रजत प्रपात अप्सरा विहार से आधा किमी की दूरी पर है। 350 फुट की ऊँचाई से गिरता इसका जल एकदम दूधिया चाँदी की तरह दिखाई देता है।

pachmarhi images (11)बी फॉल – यह जमुना प्रपात के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर से 3 किमी की दूरी पर है। पिकनिक मनाने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है।

pachmarhi images (19)राजेंद्र गिरि – इस पहाड़ी का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद के नाम पर रखा गया है। सन 1953 में डॉ॰प्रसाद स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए यहाँ आकर रुके थे और उनके लिए यहाँ रविशंकर भवन बनवाया गया था। इस भवन के चारों ओर प्रकृति की असीम सुंदरता बिखरी हुई है।

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अप्सरा विहार – पांडव गुफाओं से आगे चलने पर 30 फीट गहरा एक ताल है जिसमें नहाने और तैरने का आनंद लिया जा सकता है। इसमें एक झरना आकर गिरता है।

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जटाशंकर गुफा – यह एक पवित्र गुफा है जो पचमढ़ी कस्बे से 1.5 किमी दूरी पर है। यहाँ तक पहुँचने के लिए दूर तक पैदल चलना पड़ता है। मंदिर में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बना हुआ है। यहाँ एक ही चट्टान पर बनी हनुमानजी की मूर्ति भी एक मंदिर में है। इसके पास ही हार्पर की गुफा भी है।

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हांडी खोह – यह खाई पचमढ़ी की सबसे गहरी खाई है जो 300 फीट गहरी है। यह खाई घने जंगलों से ढँकी है और यहाँ कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। वनों के घनेपन के कारण पानी दिखाई नहीं देता| पौराणिक संदर्भ कहते हैं कि भगवान शिव ने यहाँ पर एक बड़े राक्षस रूपी सर्प को चट्टान के नीचे दबाकर रखा था। स्थानीय लोग इसे अंधी खोह भी कहते हैं जो अपने नाम को सार्थक करती है| यहाँ बने रेलिंग प्लेटफार्म से घाटी का नजारा बहुत ही खूबसूरत दिखता है।

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फेमस फ़ूड – पचमढ़ी में बिरयानी, कबाब, कोरमा, पोहा, रोगन जोश, दाल बाफला, भुट्टे की कीस, जलेबी, लड्डू, लस्सी और गन्ने का जूस यह फेमस फ़ूड है| पचमढ़ी में होटल पांडव, होटल पचमढ़ी, होटल उत्कर्ष, होटल आम्रपाली और होटल इंद्रप्रस्था यह फेमस होटल है|

सड़क – पचमढ़ी भोपाल, इन्दौर, नागपुर, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा और पिपरिया से सड़क मार्ग से सीधा जुड़ा हुआ है। पिपरिया से पचमढ़ी के लिए टैक्सी भी उपलब्ध रहती हैं।

रेल – मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर इटारसी व जबलपुर के बीच पिपरिया स्टेशन पचमढ़ी के सबसे नजदीक है।

हवाई मार्ग – पचमढ़ी भोपाल हवाई अड्डे से दिल्ली, ग्वालियर, इन्दौर, मुंबई, रायपुर और जबलपुर से जुड़ा हुआ है।

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