ईरान के ऊपर से उड़ान भरने वाले कम से कम 20 विमान और कॉरपोरेट जेटों को फर्जी जीपीएस सिग्नल से निशाना बनाया गया है. जांच के दौरान खुलासा हुआ कि एयरक्राफ्ट के नैविगेशन सिस्टम में घुसपैठ करने के लिए फर्जी सिग्नल जमीन से भेजे गए थे और ये सिग्नल इतने सटीक थे कि कई एयरक्राफ्टस अपना रास्ता भटक गए थे.
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| ईरान एयरोस्पेस में करीब 20 विमानों को फर्जी जीपीएस सिग्नल के जरिए भटकाया गया.(सांकेतिक तस्वीर) |
नई दिल्लीः ईरानी एयरस्पेस में फर्जी जीपीएस सिग्नल भेजकर विमानों को रास्ते से भटकाने का मामला सामने आने पर हड़कंप मच गया. पिछले 15 दिनों में करीब 20 विमानों को फर्जी जीपीएस सिग्नल के जरिये भटकाने का खुलासा हुआ है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ईरान के ऊपर से उड़ान भरने वाले कम से कम 20 विमान और कॉरपोरेट जेटों को फर्जी जीपीएस सिग्नल से निशाना बनाया गया है. जांच के दौरान खुलासा हुआ कि एयरक्राफ्ट के नैविगेशन सिस्टम में घुसपैठ करने के लिए फर्जी सिग्नल जमीन से भेजे गए थे और ये सिग्नल इतने सटीक थे कि कई एयरक्राफ्टस अपना रास्ता भटक गए थे.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट्स के भटकने और नैविगेशन सिस्टम के फेल होने के बाद पायलट्स को लैंड करने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की मदद लेनी पड़ी. बताया गया कि विमानों के जीपीएस सिग्नल से छेड़छाड़ का ये मामला नहीं है. ये करीब 10 साल पुरानी समस्या है, लेकिन ये पहली बार था कि यात्रियों के विमान को फर्जी जीपीएस सिस्टम के जरिए टार्गेट किया गया. अमेरिकी रेडियो तकनीक आयोग का कहना है कि फर्जी जीपीएस सिग्नल वास्तविक सैटेलाइट सिग्नल को प्रभावित करता है, जिसके चलते रिसीवर गलत स्थिति और समय बताता है.
भारतीय वाहक एआई, इंडिगो और विस्तारा सैन फ्रांसिस्को, इस्तांबुल, बाकू और लंदन जैसे गंतव्यों के रास्ते में इस हवाई क्षेत्र से होकर गुजरते हैं. एआई और इंडिगो इन मार्गों पर 777 विमान संचालित करते हैं, जिसमें इंडिगो के 777 विमान तुर्की एयरलाइंस द्वारा संचालित होते हैं. संदिग्ध जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग है, जिसे “एक हेरफेर किए गए सैटेलाइट सिग्नल के साथ एक सही सैटेलाइट सिग्नल का गुप्त प्रतिस्थापन” के रूप में परिभाषित किया गया है, जो जीपीएस रिसीवर को गलत स्थिति और समय आउटपुट करने का कारण बन सकता है.

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