एस्ट्रोनॉट्स - लिफ्ट ऑफ, लैंडिंग और स्पेस वॉक जैसी एक्टिविटी के दौरान मैग सूट या डायपर पहनते हैं, क्योंकि इन तीनों स्थितियों में बाथरूम जाना संभव नहीं होता है.

एस्ट्रोनॉट्स, जो डायपर पहनते हैं उसे मैग सूट भी कहा जाता है.

एस्ट्रोनॉट्स (Astronaut) अंतरिक्ष में अपना समय कैसे गुजारते हैं? क्या खाते-पीते हैं? क्या पृथ्वी की तरह वहां पिज्जा-बर्गर जैसी चीजें मिलती हैं? जब स्पेस वॉक पर निकलते हैं तो टॉयलेट कहां करते हैं? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर दिन भर का रूटीन क्या होता है? आइये जानते हैं…

पहले बात एस्ट्रोनॉट्स के सूट की: आपने अक्सर एस्ट्रोनॉट्स को सफेद या ऑरेंज कलर के स्पेस सूट में देखा होगा. ऑरेंज सूट को Advanced Crew Escape Suit या ACES कहा जाता है. इस सूट को सिर्फ लॉन्चिंग और लैंडिंग के वक्त पहना जाता है या अंतरिक्ष में सिर्फ शटल के अंदर इसे पहन सकते हैं. दूसरा है सफेद स्पेस सूट, जिसे Extravehicular Activity Suit या EVA भी कहते हैं. इस सूट को स्पेसवॉक या दूसरी एक्टिविटी के दौरान पहना जाता है.

सफेद कलर का ही क्यों होता है सूट? स्पेस सूट का रंग सफेद होने भी खास वजह है. अंतरिक्ष में कई जगह तापमान 135 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और एस्ट्रोनॉट्स को दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन सफेद सूट ही उन्हें बचाता है. सफेद रंग अंतरिक्ष में भी गर्मी को ठीक उसी तरह परावर्तित करता है, जैसे पृथ्वी पर करता है.

NASA के मुताबिक स्पेस सूट एक तरीके से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चैंबर की तरह काम करता है. उन्हें सर्दी, गर्मी और बहुत महीन उल्का पिंडों से बचाता है. साथ ही अंतरिक्ष से कम्युनिकेशन स्थापित करने में भी मदद करता है. स्पेस सूट के पीछे एक बैक पैक होता है. जिसमें ऑक्सीजन, पानी और बैटरी जैसी चीजें होती हैं.

एस्ट्रोनाट्स का स्पेससूट.

स्पेस सूट का वजन कितना होता है? कभी आपने सोचा है कि स्पेस सूट का वजन (Space Suit Weight in KG) कितना होता है? नासा के मुताबिक बैक पैक समेत स्पेस सूट का वजन तकरीबन 82 किलो के आसपास होता है, लेकिन यह वजन पृथ्वी पर है. चूंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण लगभग न के बराबर है, इसलिए अंतरिक्ष सूट का भी कोई वजन नहीं रह जाता है. अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस सूट पहनने में तकरीबन 45 मिनट का वक्त लगता है. सूट के नीचे खास तरीके के अंडरगारमेंट्स पहनते हैं, जो उन्हें ठंडा रखने में मदद करते हैं.

क्या डायपर पहनते हैं एस्ट्रोनॉट्स? इस सवाल का जवाब जानने से पहले आपको एक किस्सा सुनाते हैं. यह किस्सा साल 1961 का है. अमेरिका अपने पहले एस्ट्रोनॉट एलन शेफर्ड ( Alan Shepard) को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा था. ‘फ्रीडम 7’ मिशन की तैयारी पूरी हो चुकी थी और शेफर्ड को कैप्सूल में बैठाया जा चुका था, लेकिन ऐन मौके पर कुछ तकनीकी दिक्कत आ गई. शेफर्ड को कैप्सूल में ही इंतजार करने को कहा गया.

कुछ घंटे बीतने के बाद एलन शेफर्ड ने मिशन कंट्रोल को मैसेज भेजा कि वह बाथरूम जाना चाहते हैं. यह सुनकर नासा के वैज्ञानिक सोच में पड़ गए. शेफर्ड को कैप्सूल से निकाल भी नहीं सकते थे और स्पेस सूट में ही यूरिन करने की इजाजत भी नहीं दे सकते थे. वैज्ञानिकों को लग रहा था कि अगर शेफर्ड ने स्पेस सूट में यूरिन कर दिया तो बॉडी मॉनिटरिंग केबल्स में शॉर्ट सर्किट हो सकता है। बाद में उन्हें इजाजत दे दी गई. लेकिन इस घटना से नासा ने सीख ली और फिर एस्ट्रोनॉट्स के लिए MAG (Maximum Absorbency Garment) शूट तैयार किया, जिसे स्पेस डायपर भी कहा जाता है.

ऐसा दिखता है एस्ट्रोनॉट्स का डायपर.

कब पहनना पड़ता है डायपर? नासा के मुताबिक एस्ट्रोनॉट्स- लिफ्ट ऑफ, लैंडिंग और स्पेस वॉक जैसी एक्टिविटी के दौरान मैग सूट पहनते हैं, क्योंकि इन तीनों स्थितियों में बाथरूम जाना संभव नहीं होता है. मैग शूट्स आम डायपर की तरह नहीं होता, बल्कि शॉर्ट्स जैसा होता है. एस्ट्रोनॉट्स को कुल तीन मैग सूट दिए जाते हैं. एक लॉन्चिंग के लिए, एक लैंडिंग के लिए और एक स्पेस में इस्तेमाल के लिए.

अंतरिक्ष में कैसा होता है रूटीन? अंतरिक्ष या इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स का रूटीन फिक्स होता है. नासा की एस्ट्रोनॉट शैनन वॉकर एक आर्टिकल में लिखती हैं कि हमारे दिन की शुरुआत सुबह 6 बजे हो जाती है. जगने के बाद सबसे पहले दिन भर का शेड्यूल चेक करते हैं. साथ ही कमांड सेंटर द्वारा भेजी गई सूचनाओं को भी चेक करते हैं. तकरीबन 7:30 बजे तक ब्रेकफास्ट वगैरह कर लेते हैं. उसके बाद सभी कंट्रोल सेंटर चेक करते हैं कि कहीं किसी सेंटर ने कोई अतिरिक्त जानकारी तो नहीं भेजी है. इसके बाद अपना काम शुरू करते हैं.

11 घंटे काम, 9.30 बजे सो जाते हैं एस्ट्रोनॉट्स: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर दो तरह के काम होते हैं. पहला ऐसा- जिसका शेड्यूल तय है. जैसे आपको निर्धारित समय पर किसी सॉफ्टवेयर को कमांड देना है, तो देना ही होगा. इसे टाल नहीं सकते. और दूसरा ऐसे काम, जिसे कभी भी कर सकते हैं. दिन भर का वर्किंग आवर करीब 11 घंटे का होता है. दोपहर मे अंतरिक्ष यात्रियों को घंटे भर का मिड-डे मील ब्रेक मिलता है. दिन का अंत तकरीबन 7:30 बजे होता है. सबसे आखिर में एक बार फिर सारे कंट्रोल सेंटर्स को चेक करते हैं. फाइनल चेकअप के बाद डिनर करते हैं और परिवार या दोस्तों से बातचीत करते हैं. तकरीबन 9:30 बजे तक सो जाते हैं .

शैनन लिखती हैं  कि सामान्यत: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर सोमवार से शुक्रवार तक वर्किंग डे होता है. शनिवार और रविवार हाउस कीपिंग, किचन और स्टोर के काम के लिए निर्धारित होता है. चूंकि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन काफी बड़ा है, इसलिए उसकी साफ-सफाई में बहुत वक्त लग जाता है. कार्गो और स्टोर ऑर्गेनाइज करते हैं. हर दिन एक्सरसाइज का समय भी फिक्स होता है. ISS पर ट्रेड मिल, साइकिल जैसी मशीनें हैं. जिससे मसल्स और बोन की एक्सरसाइज करते हैं. इसके लिए तकरीबन ढाई घंटे का समय निर्धारित है.

अंतरिक्ष में क्या खाते हैं एस्ट्रोनॉट्स? नासा के मुताबिक एस्ट्रोनॉट्स दिनभर में तीन बार भोजन करते हैं. ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर… जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्स शामिल होते हैं. साथ ही प्रत्येक एस्ट्रोनॉट की कैलोरी का भी ध्यान रखा जाता है. ISS पर एस्ट्रोनॉट्स के लिए फल, ड्राई फ्रूट्स, पीनट बटर, चिकन, बीफ, सी-फूड्स, कैंडी और ब्राउनी जैसी चीजें उपलब्ध होती हैं। ड्रिंक में कॉफी, चाय, ऑरेंज जूस, लैमोनेड और फ्रूट पंच उपलब्ध होता है.

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