Heart Attack and Bones disease : आए दिन हार्ट अटैक से मौतें हो रही हैं. कई मामलों में तो मरीज की मौके पर ही मौत हो रही है और अस्पताल जाने तक का मौका नहीं मिल रहा है. हार्ट अटैक के कई कारण हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हड्डियों की बीमारियां भी हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं.
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| Heart Attack |
Heart Attack Causes: हार्ट की बीमारियां अब कैंसर से भी बड़ा खतरा बनती नजर आ रही हैं. आए दिन सोशल मीडिया पर वीडियो आ रहे हैं जिनमें अचानक व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ता है और उसकी मौत हो जाती है. हार्ट अटैक आने की बड़ी वजह दिल की नसों में जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड क्लॉट है. कोलेस्ट्रॉल गलत खानपान की वजह से हो रहा है, जबकि, ब्लड क्लॉट कोविड वायरस के साइड इफेक्ट के कारण हो रहा है. लेकिन सिर्फ ये दो वजह नहीं हैं जिनसे हार्ट अटैक आ जाता है.
डॉक्टरों का कहना है कि हड्डियों की बीमारी से पीड़ित मरीजों में भी दिल का दौरा पड़ने का खतरा दो गुना ज्यादा होता है. हड्डियों का दिल से कोई सीधा संबंध तो नहीं है, लेकिन फिर भी इनकी बीमारी से हार्ट अटैक आ सकता है. आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं.
डॉक्टर बताते हैं कि जोड़ों में दर्द और हड्डियों में दर्द की बीमारी (आर्थराइटिस) भी हार्ट अटैक का कारण बन सकती है. आर्थराइटिस के कारण शरीर के कई अंगों पर सूजन आ जाती है. ये सूजन जब हार्ट तक पहुंच जाती है तो इसके फंक्शन पर असर पड़ता है और दिल का दौरा पड़ जाता है. 50 साल की उम्र के बाद ये बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है.
क्या कहते हैं हड्डियों के डॉक्टर
आरएमएल हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक्स विभाग में डॉ. संकल्प कुमार बताते हैं कि आर्थराइटिस के कारण दिल की बीमारियां होने का रिस्क रहता है, हालांकि ऐसा सभी मरीजों में नहीं होता है. जिन लोगों में आर्थराइटिस या रुमेटाइड आर्थराइटिस कई सालों से है उनको ऐसा रिस्क रहता है. खासतौर पर रुमेटाइड आर्थराइटिस के जो मरीज लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित हैं उनको खतरा होता है.
अगर उम्र 50 साल से ज्यादा है तो ऐसे मरीजों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. इनमें हार्ट की बीमारी पनपने का खतरा युवाओं की तुलना में ज्यादा है. ऐसा इसलिए क्योंकि बढ़ती उम्र में आर्थराइटिस की बीमारी भी तेजी से बढ़ती है, जो दिल की बीमारी के होने के खतरे को बढ़ाती है.
कैसे करें बचाव
आर्थराइटिस के मरीजों को सलाह है कि वे डॉक्टर की सलाह के हिसाब से अपनी इस बीमारी का पूरा ट्रीटमेंट कराएं. इस दौरान हार्ट की जांच भी नियमित रूप से कराते रहें. अगर इस दौरान हार्ट में किसी बीमारी की पहचान होती है तो तुरंत उसका भी इलाज कराएं. हार्ट की बीमारी के मामले में लापरवाही बिलकुल न करें.

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