कई लोगों का सवाल रहता है कि आखिर आईफोन को भारत में बनाकर भारतीयों को ही क्यों महंगा बेचा जा रहा है। जबकि बाकी देशों में आईफोन इतना सस्ता क्यों रहता है? अगर आपके मन में ऐसा ही सवाल है, तो इसका जवाब मिलेगा आज के आर्टिकल में... 

iPhone भारत में बनने के बावजूद क्यों बिकता है महंगा? बाकी दुनिया में सस्ता कैसे? जानें इसके पीछे की पूरी गणित

आम जनता iPhone 15 के लॉन्च का लंबे वक्त से इंतजार कर रही थी। ऐसे में जब iPhone 15 लॉन्च होता है और उसकी कीमत का खुलासा होता है, तो लॉन्च का इंतजार करने वाली आम जनता का iPhone 15 खरीदने का इंतजार और लंबा हो जाता है, क्योंकि इसकी कीमत काफी ज्यादा होती है। देश की मासूम जनता इस उम्मीद में खुश थी कि इस बार iPhone 15 को भारत में बनाया जा रहा है। ऐसे में सभी सस्ते में iPhone 15 खरीद पाएंगे। अब सवाल भी वाजिब है कि जब iPhone 15 को भारत में बनाया जा रहा है, तो इसकी कीमत दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले ज्यादा क्यों है? आखिर कैसे दुबई और थाईलैंड में iPhone को सस्ता बेचा जा रहा है, तो आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा गणित

भारत में आईफोन बनने की कहानी

जी हां, ये 100 फीसद सही है कि iPhone 15 को भारत में बनाया जा रहा है। लेकिन उतना ही सच यह भी है कि आईफोन 15 के केवल बेस वेरिएंट को ही भारत में बनाया जा रहा है। अगर टेक्निकल टर्म में बात करें, तो बनाने का मतलब यह नहीं है इसे पूरी तरह से भारत में ही बनाया जाता है। हकीकत यह है कि आईफोन के पार्ट्स को जैसे कैमरा सेंसर, चिपसेट को अलग-अलग देशों से भारत मंगाया जाता है, फिर इसे बारत में असेंबल किया जाता है। मतलब भारत में बस आईफोन 15 के पार्ट्स को आपस में जोड़ने का काम किया जाता है, तो उम्मीद है कि भारत में iPhone 15 के बनाए जाने के टेक्निकल टर्म को समझ गए होंगे। ताइवान की फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी समूह चेन्नई के श्रीपेरंबदूर प्लांट में आईफोन का निर्माण करती है।

इतना महंगा कैसे?

अब बात करते हैं कि आखिर महंगा क्यों होता है? तो बता दें कि भारत सरकार की तरफ से आईफोन 15 के इंपोर्ट पर 22 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी, 2 फीसद सोशल वेलफेयर चार्ज लगाती है। इसके बाद इस पर 18 फीसद जीएसटी लगाया जाता है। ऐसे में टैक्स की वजह से आईफोन की कीमत 40 फीसद ज्यादा हो जाती है। अगर आईफोन को भारत में बनाया जाता है, तो आईफोन के पार्ट्स पर 20 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। जानकारी के लिए बता दें कि आईफोन में अलग-अलग कंपनियों के पार्ट लगाए जाते हैं। जैसे आईफोन में सैमसंग और सोनी के कैमरा सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि डिस्प्ले एलजी और सैमसंग से ली जाती है। इंपोर्ट ड्यूटी के अलावा केंद्र सरकार सर्किट बोर्ड, ट्रांजिस्टर, प्रोसेसर पर 18 फीसद जीएसटी लगाती है।

कैसे लगती है इंपोर्ट ड्यूटी

अगर आप पूरी तरह से बनाए गए आईफोन को भारत इंपोर्ट करते हैं, तो उस पर 20 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी लगाया जाता है। लेकिन अगर पार्ट मंगाकर आईफोन की असेंबलिंग भारत में करते हैं, तो आपको पीसीबी पर 20 फीसद, कैमरा मॉड्यूल पर 15 फीसद, इयरफोन पर 15 फीसद, माइक रिसीवर पर 15 फीसद, डिस्प्ले टच पैनल पर 10 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी देना होगा। बस इसी वजह से भारत में iPhone खरीदना महंगा होता है, जिन देशों में इंपोर्ट ड्यूटी को कम रखा जाता है, वहां आईफोन की कीमत कम होती है।

कब सस्ते होंगे आईफोन

केंद्र सरकार की पूरी कोशिश है कि आईफोन के पार्ट्स को भी भारत में बनाया जाए। मतलब मोबाइल फोन में लगने वाले हर आइटम को भारत में बनाया जाए। सरकार ने मोबाइल कैमरा, लीथियम ऑयन बैटरी जैसे प्रोडक्ट के भारत में बनाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई स्कीम शुरू की है। कई कंपनियों ने इसके लिए आवेदन किया है। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में मोबाइल फोन सस्ते हो सकते हैं, जब भारत में मोबाइल पार्ट्स बनना शुरू हो जाएंगे। मौजूदा वक्त में भारत में 5 से 7 फीसद आईफोन का निर्माण होता है, जिसे बढ़ाकर 25 फीसद करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए देसी कंपनी टाटा भी रेस में है।

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